
अमेरिकी GPS पर निर्भरता होगी कम, 6 महीने में स्वदेशी ‘आकाश’ रक्षा प्रणाली से जुड़ेगा NavIC
📍 श्रीहरिकोटा / नई दिल्ली
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। इसरो के शक्तिशाली GSLV-F16 रॉकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरते हुए NAV-12 नेविगेशन सैटेलाइट को पृथ्वी से 36,000 किलोमीटर ऊपर भू-स्थिर कक्षा (Geo-Stationary Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है।
यह भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) श्रृंखला का 12वां उपग्रह है, जो देश की नेविगेशन और लोकेशन क्षमताओं को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
“NAV-12 की सफल लॉन्चिंग के बाद स्वदेशी NavIC की सटीकता (Accuracy) 10 मीटर से घटकर अब 5 मीटर से भी कम हो गई है, जो विश्वस्तरीय मानकों के बराबर है।”
🚀 ‘आकाश’ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम से जुड़ेगा NavIC
इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता इसका रक्षा क्षेत्र में प्रयोग है। इसरो प्रमुख ने घोषणा करते हुए बताया कि अगले 6 महीनों के भीतर भारत की स्वदेशी ‘आकाश’ एयर डिफेंस प्रणाली (Aakash Defense System) को पूरी तरह से NavIC नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे भारतीय मिसाइलों की मारक क्षमता और सटीक टारगेट लोकेशन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
परिवहन, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा में बड़ा बदलाव
5 मीटर से कम की यह सटीक नेविगेशन सेवा सड़क परिवहन, रेलवे दुर्घटना रोकथाम प्रणाली (कवच), समुद्री जहाजों की ट्रैकिंग और सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य ऑपरेशन्स के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। संपूर्ण दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र को कवर करने वाला यह तंत्र आपात स्थितियों में भी निर्बाध सिग्नल देने में सक्षम है।



