बिहार बाढ़: गंगा-कोसी उफान पर, सीएम सम्राट और नीतीश कुमार ने प्रभावित इलाकों का जायजा लिया
बिहार में बाढ़ का कहर जारी है। नेपाल में आई भीषण फ्लैश बाढ़ और राज्य में लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा, कोसी, गंडक, सोन, बागमती, बूढ़ी गंडक और पुनपुन सहित कई नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इसका सबसे अधिक असर नकटा दियारा और अन्य निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां नदियों के उफान ने सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया है। लोग अपने मवेशियों और बच्चों के साथ ऊंची जगहों की ओर पलायन कर रहे हैं।
सीएम सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार का दौरा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को पटना के गांधी घाट और अन्य प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। सीएम सम्राट ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा बढ़ाने और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जरूरी तैयारियों को पुख्ता करने के निर्देश दिए। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि नेपाल में भारी बारिश और वहां से छोड़े जा रहे पानी के कारण बिहार के कई इलाकों में स्थिति खराब हुई है।
गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 49.71 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (48.60 मीटर) से 1.11 मीटर ऊपर है। हथीदाह (मोकामा) में जलस्तर 42.96 मीटर (खतरे का निशान 41.76 मीटर) और दीघा घाट पर 51.60 मीटर दर्ज किया गया। यह पटना में 2016 के बाद गंगा का सबसे उच्च जलस्तर है। जल संसाधन विभाग ने बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए सोन बैराज (इंद्रपुरी) के सभी 69 गेट खोल दिए हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी है। 27 SDRF और 9 NDRF टीमें प्रभावित जिलों में तैनात हैं। 13 जिलों में 286 नावें चल रही हैं। भागलपुर के राघोपुर पंचायत में चार सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं, जहां 43,000 से अधिक लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया है। बिहार के कई जिलों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। दीघा से BJP विधायक संजीव चौरसिया ने प्रभावितों को अस्थायी शिविर और चारे की व्यवस्था का आश्वासन दिया है।
बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट रहने और नदी किनारे के इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। लोगों को घाटों और तटबंधों के पास न जाने की भी सलाह दी गई है। यह बाढ़ स्थिति अक्टूबर की शुरुआत तक बनी रह सकती है, इसलिए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।
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