बिहार में 4 महीने में 199 करोड़ की साइबर ठगी, 602 गिरफ्तार, 5,035 म्यूल खाते चिह्नित
बिहार में साइबर अपराध ने पिछले चार महीनों में विकराल रूप ले लिया है। वर्ष 2026 के पहले चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) के दौरान राज्य में ₹199.09 करोड़ की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। इस अवधि में 59,579 साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज की गईं, जिसके बाद बिहार ऑनलाइन साइबर शिकायतों और FIR दर्ज करने वाले राज्यों में देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने इस बढ़ते खतरे के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 602 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए लगभग ₹51.84 करोड़ की रकम होल्ड कराई है, जबकि लगभग ₹7.06 करोड़ पीड़ितों को वापस कराए गए हैं। पिछले वर्ष 2025 में 1,098 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था।
म्यूल खातों और बैंक शाखाओं की जांच
जांच में एक बड़ा खुलासा म्यूल बैंक खातों का हुआ है। CCSU ने अब तक 5,035 म्यूल बैंक खातों की पहचान की है, जिनका उपयोग अपराधी ठगी की रकम को ट्रांसफर करने और उसकी असली उत्पत्ति छिपाने के लिए करते थे। इनमें से 1,200 से अधिक खातों को बंद कराया जा चुका है। 22 बैंक शाखाओं को चिह्नित किया गया है, जहां सर्वाधिक संदिग्ध खाते खोले गए हैं। इन शाखाओं के कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है, और पांच बैंक कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
साइबर अपराधी अब डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं, UPI फ्रॉड, सोशल मीडिया स्कैम, रिमोट एक्सेस ऐप और फर्जी KYC अपडेट जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने 4,147 मोबाइल नंबर और 638 IMEI नंबर ब्लॉक किए हैं। 162 संदिग्ध PoS एजेंटों की पहचान की गई है। फर्जी दस्तावेज (आधार, पैन, राशन कार्ड) जारी करने वाली 41 FIR दर्ज की गई हैं और 67 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं।
इस साइबर अपराध से निपटने में राज्य की 1930 हेल्पलाइन एक महत्वपूर्ण उपकरण बनकर उभरी है। फरवरी 2026 में PSTN सुविधा लागू होने के बाद औसत दैनिक कॉल 5,500 से बढ़कर 8,100 हो गई हैं। साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “सोशल इंजीनियरिंग” साइबर अपराधियों का सबसे शक्तिशाली हथियार बन गई है, जिसके जरिए वे पीड़ितों के डर, लालच और त्वरित लाभ की इच्छा का शोषण करते हैं। बिहार पुलिस, CCSU और बैंकिंग एजेंसियां संयुक्त रूप से इन साइबर अपराध सिंडिकेट्स की जांच कर रही हैं।
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