सुपौल: भारत-नेपाल सीमा पर डीएम-एसपी का 7 किमी पैदल मार्च, तस्करी पर शिकंजा
बिहार के सुपौल जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया। जिलाधिकारी सावन कुमार और पुलिस अधीक्षक शरथ आर.एस. के नेतृत्व में एसएसबी (45वीं बटालियन) एवं अन्य सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम ने वीरपुर नगर क्षेत्र से मुंशी पिपराही बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) तक 7 किलोमीटर का पैदल मार्च किया। यह निरीक्षण नो मैन्स लैंड पर अवैध निर्माण, अतिक्रमण और तस्करी पर रोक लगाने के उद्देश्य से किया गया।
सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए चलाए गए इस अभियान में टीम ने बॉर्डर रोड से होते हुए मुंशी पिपराही सीमा तक पैदल चलकर हर संवेदनशील स्थान का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में मिले दो-पहिया और चार-पहिया वाहनों की गहनता से जांच की गई, जिससे अवैध परिवहन और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण लग सके। यह कदम सीमा पर बढ़ती अवैध गतिविधियों के मद्देनजर उठाया गया।
तस्करी और अवैध गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाना प्राथमिकता
जिलाधिकारी सावन कुमार ने बताया कि इस पैदल मार्च का मुख्य उद्देश्य सीमा क्षेत्र में मौजूद सभी संवेदनशील स्थानों और संदिग्ध संरचनाओं को चिन्हित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नार्कोटिक्स (मादक पदार्थ), अवैध शराब, हथियार सहित किसी भी प्रकार की तस्करी और अवैध गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस संयुक्त अभियान से सीमा क्षेत्र में सक्रिय तस्करों में हड़कंप का माहौल है।
इस निरीक्षण के दौरान वीरपुर एसडीएम विनय कुमार, एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार, बसंतपुर बीडीओ सुजीत कुमार मिश्रा, एसएसबी के वरिष्ठ पदाधिकारी तथा बिहार पुलिस और एसएसबी के बड़ी संख्या में सशस्त्र जवान मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान सीमा के दूसरी ओर नेपाल की सुरक्षा एजेंसी आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) के जवान भी मुस्तैद दिखाई दिए।
सुपौल जिलाधिकारी ने बताया कि पुलिस और एसएसबी की संयुक्त गश्त और चेकिंग अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां सीमा क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने आम लोगों से सीमा क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या एसएसबी को देने की अपील की है।
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