वाहन पंजीकरण रद्द होने पर अब 30 दिन का समय, RC जमा करने का नया नियम लागू
वाहन मालिकों के लिए एक राहत भरी खबर है। अब यदि किसी वाहन का पंजीकरण प्रमाण-पत्र (RC) रद्द होता है, तो संबंधित दस्तावेज जमा करने के लिए पहले की तुलना में अधिक समय मिलेगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव करते हुए यह अवधि 14 दिन की जगह 30 दिन कर दी है, जो 15 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुकी है।
नए नियम के अनुसार, यदि कोई वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया है या स्थायी रूप से चलने लायक नहीं रह गया है, तो उसके मालिक को पंजीकरण प्रमाण-पत्र रद्द करने की सूचना देने के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा। इससे पहले यह समय सीमा केवल 14 दिन थी। मंत्रालय का उद्देश्य लोगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने में आसानी प्रदान करना है, ताकि समय की कमी के कारण किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 55 में संशोधन
यह बदलाव मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 55 से संबंधित है। इस धारा के तहत, यदि कोई वाहन क्षतिग्रस्त या अनुपयोगी हो जाता है, तो मालिक के लिए पंजीकरण प्राधिकारी को सूचित करना अनिवार्य होता है। नए नियम के तहत अब मालिकों को यह सूचना देने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा। इसके अलावा, पंजीकरण प्राधिकारी वाहन की स्थिति की जांच करके उचित कार्रवाई करेगा, जिससे पारदर्शिता और प्रशासनिक सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सके।
जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत किए गए इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य दंडात्मक-आपराधिक ढांचे से हटकर प्रशासनिक-विश्वास आधारित प्रणाली की ओर बढ़ना है। इस कानून में ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिन की ग्रेस अवधि और बीमा हस्तांतरण की सूचना अवधि को 14 से बढ़ाकर 30 दिन करने जैसे अन्य प्रावधान भी शामिल हैं। ये बदलाव आम नागरिकों के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक लचीला और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
इन परिवर्तनों को दस्तावेज़ जमा करने की अवधि को दोगुना करने के रूप में देखा जा रहा है, जो वास्तविक दुनिया की प्रशासनिक देरी को ध्यान में रखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वाहन मालिकों को कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने में काफी सुविधा होगी और अनावश्यक जुर्माने या कानूनी कार्यवाही से बचा जा सकेगा। नए नियम के तहत वाहन मालिकों को अब अपने दस्तावेज जमा करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहूलियत दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
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