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बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड: सरकार ने अधिकतम ऋण राशि घटाकर 2 लाख की, नई व्यवस्था 2026-27 से लागू

पटना, 20 अगस्त 2026। बिहार सरकार ने राज्य के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब इस योजना के तहत विद्यार्थियों को अधिकतम दो लाख रुपये तक का ही ऋण मिलेगा, जबकि पहले यह सीमा चार लाख रुपये तक थी। शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी।

बजटीय बाधाओं के चलते लिया गया निर्णय

शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्णय योजना की बजटीय बाधाओं और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को कवर करने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि प्रति छात्र राशि कम करने से योजना का लाभ अधिक संख्या में छात्रों तक पहुंच सकेगा और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह कदम राज्य में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक ‘आवश्यक सुधार’ के रूप में देखा जा रहा है।

छात्र संगठनों ने जताई निराशा

राज्य सरकार के इस फैसले से छात्रों और अभिभावकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई छात्र संगठनों ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे पिछड़ा हुआ और निराशाजनक बताया है। उनका कहना है कि बढ़ती शिक्षा लागत और महंगाई के इस दौर में पहले से चार लाख रुपये की सीमा भी अपर्याप्त थी, और अब घटाकर दो लाख रुपये कर देना नाममात्र की राशि है। यह राशि प्रतिष्ठित संस्थानों और पेशेवर पाठ्यक्रमों के खर्चों को पूरा करने में सक्षम नहीं होगी, जिससे छात्रों के उच्च शिक्षा के सपनों पर संकट आ सकता है।

वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि यह राशि सरकारी और राज्य-संचालित कॉलेजों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्रों के लिए पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि पात्रता मानदंडों और ऋण वितरण प्रक्रिया में भी सुधार किए गए हैं, ताकि पात्र छात्रों को समय पर और परेशानी मुक्त ऋण मिल सके। सरकार का दावा है कि योजना में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है।

गौरतलब है कि बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना पिछले कुछ वर्षों से राज्य के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का सपना साकार करने में एक महत्वपूर्ण सहारा रही है। इस योजना के तहत अब तक लाखों छात्रों को लाभ मिल चुका है। हालांकि, नई सीमा को लेकर जहां एक ओर छात्रों में निराशा है, वहीं सरकार का कहना है कि यह एक आवश्यक सुधार है और आने वाले वर्षों में योजना की राशि और शर्तों में और बदलाव हो सकते हैं।


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