झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: CID-SIT जांच में धांधली की पुष्टि के बाद 45 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द
झारखंड सरकार ने राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। CID और SIT की संयुक्त जांच में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद सरकार ने 45 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। यह कदम उन सभी परीक्षाओं के संबंध में उठाया गया है, जिनमें अनियमितताएं और पदों को बेचने की कोशिशों के गंभीर सबूत मिले हैं। इस फैसले से राज्य के लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, और आंदोलनकारी छात्र संगठन अब CBI जांच की मांग को लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल, छात्रों में रोष
रद्द की गई परीक्षाओं की सूची में JSSC-CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल) परीक्षा भी शामिल है, जो पहले 2024 में भी रद्द हो चुकी थी और CID से फिर से जांच कराई जा रही थी। सरकार का कहना है कि जांच में यह बात सामने आई कि परीक्षा के माध्यम से पदों को बेचने की कोशिश की गई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने इस फैसले को युवाओं के भविष्य और निष्पक्षता की रक्षा के लिए आवश्यक बताया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र सिर्फ परीक्षा रद्द करने को पर्याप्त नहीं मानते। उनका कहना है कि सिर्फ परीक्षा रद्द करने से भ्रष्टाचार की जड़ें नहीं खत्म होंगी, बल्कि दोषियों की पहचान कर उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए, इसलिए वे CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह स्थगित नहीं, नई अधिसूचनाएं जारी
हालांकि, झारखंड में सरकारी भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह स्थगित नहीं हुई है। प्रशासन ने साफ किया है कि जिन परीक्षाओं में कोई अनियमितता नहीं पाई गई है, उनकी प्रक्रिया जारी रहेगी। JSSC द्वारा 10+2 इंटर लेवल JILCCE के 326 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसके लिए आवेदन 5 अगस्त से 4 सितंबर तक किए जा सकते हैं। इसके अलावा, जेएसएससी द्वारा जारी पारा टीचर (JTAACCE) के 7,299 पदों सहित अन्य अधिसूचनाएं भी जारी की गई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को पटरी पर लाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
इस बीच, CID और SIT की संयुक्त जांच जारी है। एजेंसियां अब 45 रद्द परीक्षाओं के आंकड़ों, सवाल-जवाब, और संपर्क सूत्रों को खंगाल रही हैं ताकि धांधली के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों की निगाहें अब इस जांच की दिशा पर टिकी हुई हैं, जो राज्य की भर्ती प्रणाली में सुधार की दिशा तय करेगी। यह मामला न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर एक बड़ा सवालिया निशान भी खड़ा करता है।
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