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सुपौल: पेपरलेस रजिस्ट्री के विरोध में कातिबों का अनिश्चितकालीन आंदोलन, पहले दिन नहीं हो सकी एक भी रजिस्ट्री

📍 स्थानीय खबरें   |   August 18, 2026

सुपौल निबंधन कार्यालय में पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में कातिबों (लिपिकों) ने अनिश्चितकालीन असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया है। आंदोलन के पहले दिन यानी 17 अगस्त को नई व्यवस्था के तहत एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी। इस दौरान 23 पुराने लंबित मामलों में से केवल 8 का ही निष्पादन हो सका, जिससे रजिस्ट्री कराने आए आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

कातिबों का आरोप: जल्दबाजी में लागू की गई नई प्रणाली

कातिबों का आरोप है कि सरकार ने बिना किसी पूर्व तैयारी और उनके सुझावों को नजरअंदाज करते हुए जल्दबाजी में पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली लागू कर दी है। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों, इंटरनेट की धीमी गति और नई प्रणाली की जटिलताओं के कारण काम ठीक से नहीं हो पा रहा है। इस आंदोलन ने जिले के रजिस्ट्री कार्यों को प्रभावित कर दिया है, जिससे जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया ठप हो गई है।

आम लोगों को उठानी पड़ रही भारी दिक्कतें

आंदोलन के कारण जमीन खरीद-बिक्री करने वाले कई आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक बड़ी संख्या में लोग रजिस्ट्री कराने के लिए निबंधन कार्यालय में इकट्ठा हुए थे, लेकिन आंदोलन के कारण उन्हें खाली लौटना पड़ा। कई लोगों ने कातिबों से अनुरोध किया कि वे कुछ समय के लिए काम करें, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।

कातिबों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, वे अपना अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रखेंगे। उनकी प्रमुख मांगों में नई प्रणाली के पायलट प्रोजेक्ट के बाद व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन, स्टाफ को पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण देने, इंटरनेट कनेक्टिविटी और हार्डवेयर सुधारने, निबंधन कार्यों को सुचारू करने के लिए पर्याप्त कर्मियों की तैनाती करने और पेपरलेस रजिस्ट्री के क्रियान्वयन से पहले उनकी बात सुनने की मांग शामिल है।

सरकारी अधिकारियों ने आंदोलन पर नजर रखी है और मामले को जल्द सुलझाने की बात कही है। जिला प्रशासन का कहना है कि लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इस घटना ने राज्य में ई-गवर्नेंस के क्रियान्वयन में तकनीकी और मानवीय चुनौतियों को एक बार फिर उजागर किया है। आने वाले दिनों में सरकार और कातिबों के बीच संभावित बैठकों से ही इस गतिरोध से निकलने की उम्मीद है।


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