बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना 5 साल बढ़ी, ₹950 करोड़ मंजूर
उच्च शिक्षा को बड़ा प्रोत्साहन: 4.15 लाख छात्रों को मिला सीधा लाभ; फर्जीवाड़े पर कसता शिकंजा, वैशाली के 3 समेत 13 कॉलेजों पर रोक
📍 पटना (बिहार) | विशेष रिपोर्ट
बिहार में आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित होने वाले मेधावी विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली बिहार कैबिनेट ने ‘बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ को अगले 5 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक) के लिए विस्तारित करने का औपचारिक निर्णय लिया है। इसके क्रियान्वयन के लिए ₹950 करोड़ की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है, साथ ही एक नया पारदर्शी कार्यान्वयन प्रारूप भी लागू किया गया है।
4.15 लाख से अधिक छात्रों को मिला लाभ; ₹950 करोड़ के बजट के साथ 2030-31 तक बढ़ाई गई अवधि।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक राज्य भर के लगभग 4.15 लाख छात्र-छात्राओं को तकनीकी और व्यावसायिक कोर्सेज में पढ़ाई के लिए आर्थिक ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सभी जिलों को नया लक्ष्य आवंटित किया गया है; उदाहरणस्वरूप बेगूसराय जिले में 3,450 छात्र और गोपालगंज में 2,240 नए विद्यार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य तय हुआ है।
हालांकि, योजना के परिचालन में कुछ स्थानीय समस्याएं भी उभरी हैं। कई जिलों से छात्रों ने बैंक खातों में समय पर लोन की किस्त न पहुंचने की शिकायत दर्ज कराई है, जिससे उनकी सेमेस्टर फीस और परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। विभाग ने इन तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए निर्देश जारी किए हैं।
🚫 13 फर्जी कॉलेजों पर रोक और बकाएदारों से रिकवरी की तैयारी
योजना की आड़ में हो रही धांधली पर राज्य सरकार ने कड़ा चाबुक चलाया है। निर्धारित सीट क्षमता से अधिक बोनाफाइड (प्रवेश पत्र) जारी करने और फर्जी नामांकन के मामलों में **13 कॉलेजों के नए विद्यार्थियों के भुगतान पर तत्काल रोक** लगा दी गई है, जिनमें वैशाली जिले के 3 प्रमुख संस्थान भी शामिल हैं।
नियम उल्लंघन पर 13 संस्थानों पर सीलिंग; किस्त व हलफनामा न देने वाले पासआउट्स पर रिकवरी एक्शन।
दूसरी ओर, केवल बेगूसराय जिले में लगभग 2,888 पासआउट छात्र ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिन पर 67 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया है। ये छात्र न तो मासिक किस्तें जमा कर रहे हैं और न ही नियमानुसार बेरोजगारी का हलफनामा (Affidavit) जमा कर रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ऐसे डिफ़ॉल्टरों के खिलाफ वित्तीय वसूली की वैधानिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
यह फैसला राज्य के गरीब व मध्यमवर्गीय मेधावी छात्रों के सपनों को नई उड़ान देगा, साथ ही फर्जीवाड़े पर नकेल कसने से सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।


