आज 2026 का पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण, यूरोप में छाएगा अंधेरा
खगोलीय घटना का दुर्लभ नजारा: आइसलैंड और स्पेन में दिन में दिखेगा रात जैसा दृश्य; भारत में सूतक काल मान्य नहीं
📍 नई दिल्ली | खगोल विज्ञान विशेष रिपोर्ट
वर्ष 2026 का पहला और एकमात्र पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) आज, 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह एक अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना है, जिसके दौरान चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच पूरी तरह आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेगा। इसके कारण यूरोप, आर्कटिक और अटलांटिक महासागर के कई हिस्सों में दिन के समय अचानक अंधेरा छा जाएगा।
भारतीय समयानुसार आज रात 9:04 बजे से शुरू होकर 13 अगस्त को तड़के 1:28 बजे तक रहेगा।
मुख्यभूमि यूरोप के लिए यह सूर्य ग्रहण ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि वर्ष 1999 के बाद पहली बार वहां पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा देखने को मिल रहा है। यह पूर्ण ग्रहण का पथ मुख्य रूप से आइसलैंड और उत्तरी स्पेन से होकर गुजरेगा, जबकि पुर्तगाल का एक छोटा सा भू-भाग भी इसके दायरे में आएगा। इसके अलावा, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के विशाल क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Eclipse) दिखाई देगा।
आइसलैंड में यह 1954 के बाद पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण है (जिसके बाद अगला ऐसा नजारा वर्ष 2196 में ही दिखेगा)। वहीं स्पेन में 1905 के बाद पहली बार यह प्राकृतिक घटना घटित हो रही है। इस ग्रहण की अधिकतम अवधि लगभग 2 मिनट 18 सेकेंड होगी, जो अटलांटिक महासागर में आइसलैंड के पश्चिमी हिस्से के पास दर्ज की जाएगी।
🇮🇳 भारत में स्थिति और लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा
भारतीय अंतरिक्ष प्रेमियों और आम नागरिकों के लिए यह घटना प्रत्यक्ष रूप से देखने को नहीं मिलेगी, क्योंकि ग्रहण के समय भारत में रात होगी और सूर्य क्षितिज से नीचे रहेगा। चूंकि यह भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देश में **सूतक काल (Sutak Period)** मान्य नहीं होगा और न ही कोई धार्मिक पाबंदियां लागू होंगी।
NASA और ESA के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रात 10:45 बजे से लाइव देख सकते हैं।
भारतीय दर्शक इस अद्भुत खगोलीय घटना का आनंद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के आधिकारिक यूट्यूब चैनल व लाइव वेबकास्ट के जरिए रात करीब 10:45 बजे से ले सकते हैं।
12 अगस्त 2026 का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटना है। वैज्ञानिक इस दौरान सूर्य के बाहरी वायुमंडल ‘कोरोना’ (Corona) का अध्ययन करने के लिए विशेष शोध उपकरण तैनात कर रहे हैं।


