
गौतम और सागर अदाणी के खिलाफ SEC मुकदमे में तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से कोर्ट का इनकार, कानूनी आधार को बताया अपर्याप्त
अमेरिका की एक संघीय अदालत (US Federal Court) ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के मामले में बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक भारतीय मूल के व्यक्ति द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका (Intervention Petition) को खारिज कर दिया है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि इस पूरे मामले के पीछे तथाकथित “डीप स्टेट” (Deep State) की साजिश काम कर रही है। हालांकि, अमेरिकी अदालत ने इन तर्कों को पूरी तरह से कानूनी रूप से आधारहीन करार देते हुए मुकदमे में किसी भी प्रकार के तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।
“कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि इस मुकदमे में उनका कोई प्रत्यक्ष कानूनी हित जुड़ा है। प्रस्तुत दस्तावेज हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त नहीं हैं।”
अदाणी समूह और अमेरिकी SEC का मूल मामला
यह पूरा मामला गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ अमेरिकी SEC द्वारा दायर एक सिविल मुकदमे से जुड़ा हुआ है, जिसमें प्रतिभूति कानूनों (Securities Laws) के कथित उल्लंघन से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।
दूसरी ओर, अदाणी समूह शुरुआत से ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। समूह का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह की गैरकानूनी या नियम-विरुद्ध गतिविधि नहीं की है और वे कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।
फैसले का मूल मुकदमे पर क्या असर पड़ेगा?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह हालिया फैसला केवल तीसरे पक्ष द्वारा दाखिल की गई अवांछित याचिका को खारिज करने तक सीमित है। इसका अदाणी समूह के खिलाफ चल रहे मूल SEC मुकदमे के गुण-दोष (Merits) पर कोई सीधा या प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता है। मुख्य मामला अदालत में अपनी तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ता रहेगा।
अदालत के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि बिना किसी ठोस सबूत, कानूनी आधार और प्रत्यक्ष हित के किसी भी तीसरे पक्ष को इस तरह के संवेदनशील मामलों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। अब वैश्विक बाजार और कानूनी जानकारों की निगाहें SEC के मूल मुकदमे की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।


