
औषधीय गुणों से भरपूर आंवला उत्पादन में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का वर्चस्व, एनएचबी के आंकड़ों में बड़ा खुलासा
भारत में औषधीय और पोषक गुणों से भरपूर आंवला (Indian Gooseberry) की खेती न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश के लाखों किसानों की आय का भी एक प्रमुख साधन बन चुकी है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल आंवला उत्पादन में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का एकतरफा दबदबा देखने को मिल रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा आंवला उत्पादक राज्य बन चुका है, जो अकेले कुल उत्पादन का लगभग 36.49% योगदान देता है। वहीं, उत्तर प्रदेश 32.80% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर काबिज है। दोनों राज्य मिलकर अकेले देश के कुल आंवला उत्पादन का करीब 70% हिस्सा कवर करते हैं।
“मध्य प्रदेश (36.49%) और उत्तर प्रदेश (32.80%) मिलकर भारत का 70% आंवला पैदा करते हैं, जबकि तमिलनाडु 14.23% के साथ तीसरे स्थान पर है।”
📊 प्रमुख आंवला उत्पादक राज्यों की सूची (NHB डेटा)
दक्षिण भारत में तमिलनाडु 14.23% योगदान देकर तीसरे स्थान पर बना हुआ है। इसके अलावा देश के अन्य राज्यों में भी आंवले की खेती का विस्तार तेजी से हो रहा है:
- 🥇 मध्य प्रदेश: 36.49%
- 🥈 उत्तर प्रदेश: 32.80%
- 🥉 तमिलनाडु: 14.23%
- 4️⃣ गुजरात: 4.96%
- 5️⃣ छत्तीसगढ़: 2.95%
- 6️⃣ राजस्थान: 2.07%
- 7️⃣ असम: 1.52%
- 8️⃣ पंजाब: 1.18%
- 9️⃣ हरियाणा: 0.90%
- 🔟 आंध्र प्रदेश: 0.48%
कृषि और प्रोसेसिंग सेक्टर में बढ़ती मांग
आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल कॉस्मेटिक्स, जूस, मुरब्बा, चूर्ण, कैंडी और हेल्थ सप्लीमेंट्स में आंवले की बढ़ती खपत ने इसकी व्यावसायिक मांग को कई गुना बढ़ा दिया है। आधुनिक तकनीक, बेहतर पौध प्रबंधन और मार्केट लिंकेज के चलते अब किसान पारंपरिक फसलों से हटकर आंवला बागवानी में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।


