
🌊 पटना: बिहार में हर साल विनाशकारी बाढ़ का कारण बनने वाली ‘बिहार का शोक’ कही जाने वाली कोसी नदी पर अब अंतरिक्ष से पैनी नजर रखी जाएगी। बिहार सरकार ने नेपाल के कैचमेंट एरिया से आने वाले पानी और संभावित बाढ़ की सटीक पूर्व चेतावनी (Early Warning) पाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है।
📡 इस नई सैटेलाइट निगरानी प्रणाली के तहत ISRO की मदद से कोसी बेसिन के 6,960 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की लगातार मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है। इसमें नेपाल के ऊपरी पहाड़ी इलाकों से लेकर बिहार के मैदानी इलाकों में नदी के जलस्तर और बहाव की रीयल-टाइम तस्वीरें व डेटा जल संसाधन विभाग को सीधे प्राप्त होंगे।
- 👉 ISRO से ऐतिहासिक करार: नेपाल से आने वाली बाढ़ की पूर्व सूचना के लिए अंतरिक्ष तकनीक का सहारा।
- 🛰️ विशाल कवरेज: कोसी बेसिन के 6,960 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की 24×7 सैटेलाइट निगरानी।
- ⏱️ सटीक अलर्ट: बाढ़ आने से पहले निचले इलाकों के लोगों और प्रशासन को मिलेगा सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का समय।
🛡️ समय रहते होगा बचाव कार्य: इस एडवांस वार्निंग सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नेपाल के वराहक्षेत्र और नेपाल-भारत सीमा पर पानी का डिस्चार्ज बढ़ने से कई घंटे पहले ही बिहार के जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन को अलर्ट मिल जाएगा। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया और कटिहार जैसे जिलों में राहत व बचाव कार्य समय रहते शुरू किए जा सकेंगे।
💡 नदी के मार्ग बदलने पर भी नज़र: कोसी नदी अक्सर अपनी धारा (कटान) बदलने के लिए जानी जाती है। ISRO की रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट तकनीक से नदी के तटबंधों की स्थिति, कटाव के नए रुझानों और जलभराव वाले इलाकों का सटीक नक्शा तैयार होगा, जिससे तटबंधों की सुरक्षा को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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