
🏫 कोलकाता / राजनीति: स्कूलों में मिड-डे मील (School Lunch) की थाली से अंडा हटाए जाने के फैसले के बाद बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। नई सरकार ने स्कूलों में अंडे की जगह शुद्ध शाकाहारी भोजन देने का निर्णय लिया है, जिसे एक हिंदू चैरिटी संस्था के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार के इस कदम के बाद विपक्षी दल और शिक्षाविद आमने-सामने आ गए हैं।
🔍 पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए इसे राज्य के खान-पान और सांस्कृतिक अधिकारों पर कुठाराघात करार दिया है। उन्होंने कहा कि “बंगाल में बच्चों के भोजन से जबरन अंडा हटाना हमारी संस्कृति और परंपरा के खिलाफ है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विचारधारा को बच्चों की थाली पर थोप रही है।
- 👉 नया फैसला: मिड-डे मील में अंडे की जगह शुद्ध शाकाहारी भोजन सप्लाई करने का निर्णय।
- 🏛️ ममता बनर्जी का हमला: फैसले को बताया बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ।
- 👩🏫 शिक्षकों की चिंता: भोजन से अंडा हटाने से स्कूलों में गरीब छात्रों की उपस्थिति घटने का डर।
- 🥗 न्यूट्रिशन पर बहस: बच्चों के पोषण सुरक्षा और प्रोटीन की कमी को लेकर उठे सवाल।
🗣️ शिक्षकों और अभिभावकों की चिंता: इस फैसले से केवल राजनीतिक हलकों में ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में भी हड़कंप मच गया है। कई शिक्षकों का कहना है कि मिड-डे मील में अंडा मिलने के कारण गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते थे। अब अंडा हटने से छात्रों की उपस्थिति में भारी गिरावट आने का खतरा मंडरा रहा है।
💡 पोषण और प्रोटीन का मुद्दा: स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी सवाल उठाया है कि बढ़ते बच्चों के लिए अंडा प्रोटीन का एक सस्ता और सुलभ जरिया था। शाकाहारी भोजन से उसकी भरपाई कैसे होगी, यह एक बड़ा सवाल बन गया है।
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