
बिहार के कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अनोखी और क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है, जिससे अब बेकार समझकर फेंकी जाने वाली आम की गुठलियों से शुद्ध मक्खन (Butter) और खुशबूदार तेल (Oil) तैयार किया जा सकेगा। यह आविष्कार किसानों की आमदनी बढ़ाने और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
यह शानदार वैज्ञानिक कामयाबी बिहार के भागलपुर जिले में स्थित ‘बिहार कृषि विश्वविद्यालय’ (BAU), सबौर के वैज्ञानिकों को मिली है। इस बड़ी खोज और सफल रिसर्च का वीडियो व विवरण इस हफ्ते (7 से 9 जुलाई 2026) देश भर के कृषि और वैज्ञानिक गलियारों में जबरदस्त सुर्खियां बटोर रहा है।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) के खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख वैज्ञानिकों की टीम ने एक विशेष प्रसंस्करण (Processing) विधि के जरिए आम की गुठली के अंदर के हिस्से (Kernels) से वसा यानी फैट को निकाला है। इस फैट को रिफाइन करके जो ‘मैंगो कर्नल बटर’ और तेल तैयार किया गया है, वह न सिर्फ खाने के योग्य है, बल्कि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स और विटामिन-ई की मात्रा भरपूर पाई गई है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मक्खन कोको बटर की तरह काम करता है, जो त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करने और औषधीय उत्पाद बनाने में बेहद उपयोगी है।
इस तकनीक के आने से सबसे बड़ा फायदा आम उत्पादक किसानों और फल प्रसंस्करण उद्योगों को होगा। भारत में हर साल लाखों टन आम की गुठलियां कचरे के रूप में फेंक दी जाती हैं, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। अब इस कचरे को ‘कंचन’ में बदलकर किसान अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन अब इस तकनीक के पेटेंट (Patent) और इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने के लिए स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियों के साथ बातचीत करने की तैयारी कर रहा है।
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