
सिक्किम सरकार ने बुनियादी ढांचे पर खर्च किए ₹27 करोड़, सीमावर्ती अर्थव्यवस्था और स्थानीय व्यापारियों में खुशी की लहर
📍 गैंगटॉक / नई दिल्ली
भारत और चीन के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों में एक बड़ी और सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है। सिक्किम में स्थित प्रसिद्ध नाथूला दर्रा (Nathu La Pass) लगभग 6 वर्षों के लंबे ब्रेक के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोला जा रहा है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, आगामी 1 अगस्त से इस ऐतिहासिक सीमा मार्ग पर दोनों देशों के बीच सीमित सीमा व्यापार (Border Trade) पुन: बहाल हो जाएगा।
नाथूला दर्रा सिक्किम को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है। वर्षों से दोनों देशों के स्थानीय सीमावर्ती समुदायों की आजीविका और व्यापार का यह मुख्य जरिया रहा है। बीते वर्षों में विभिन्न परिस्थितियों और सुरक्षा कारणों से इस मार्ग पर गतिविधियां स्थगित थीं।
“व्यापार की सुचारू बहाली के लिए सिक्किम सरकार ने ₹27 करोड़ की लागत से सड़कों का चौड़ीकरण, आधुनिक चेकिंग प्वाइंट्स और ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है।”
📈 स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि नाथूला दर्रे के फिर से खुलने से पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों में जबरदस्त तेजी आएगी। स्थानीय व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों को इसका सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा। साथ ही, परिवहन और रसद (Logistics) के क्षेत्र में नए रोजगार का सृजन भी होगा।
प्राचीन ‘सिल्क रूट’ का ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व
नाथूला दर्रा केवल एक सामान्य व्यापारिक मार्ग नहीं है, बल्कि यह प्राचीन ‘सिल्क रूट’ (Silk Route) का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों में इसकी बड़ी ऐतिहासिक और रणनीतिक भूमिका रही है। इस मार्ग पर व्यापार का संचालन सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल और दोनों देशों के कस्टम्स मानकों के तहत ही किया जाएगा।



